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Bihar Minister Madan Sahni Offered His Resignation Due To Dictatorial Behavior Of Officers – अफसरों की तानाशाही: नीतीश सरकार में मत्री मदन सहनी ने किया इस्तीफा देने का एलान


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Thu, 01 Jul 2021 08:25 PM IST

सार

बिहार में सरकारी अधिकारियों का रवैया कैसा है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है जब इससे त्रस्त होकर एक मंत्री इस्तीफा देने तक की बात कह दे। बिहार सरकार में समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी ने अधिकारियों के तानाशाही रवैये से परेशान होकर अपने इस्तीफे की पेशकश कर दी है।

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बिहार सरकार में नीतीश कैबिनेट के समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी ने गुरुवार को अपने इस्तीफे की पेशकश कर दी। उन्होंने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा कि मैं अफसरों के तानाशाही रवैये की वजह से इस्तीफा देने का मन बना रहा हूं। सहनी का कहना है कि अधिकारी तो अधिकारी विभाग के चपरासी भी मेरी बात नहीं सुनते हैं। ऐसे में मैं पार्टी में बना रहूंगा और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बताए रास्ते पर चलता रहूंगा, लेकिन मंत्री पद से त्यागपत्र दे दूंगा।

सहनी ने कहा, मैं सालों से परेशानी और यातना झेल रहा हूं। मैं सुविधाओं का फायदा उठाने के लिए मंत्री नहीं बना हूं, जनता की सेवा करने के लिए बना हूं। ऐसे में जब मैं जनता का काम ही नहीं कर पाऊंगा तो मंत्री रहकर क्या करूंगा। उन्होंने कहा कि यह कोई  जल्दबाजी में लिया गया फैसला नहीं है। लंबे समय तक अधिकारियों से परेशान होने के बाद मैंने यह कदम उठाया है। सहनी ने कहा कि लोग कहते हैं कि नेता चोर हैं और मैं कहता हूं कि अधिकारी चोर हैं।

विस्तार

बिहार सरकार में नीतीश कैबिनेट के समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी ने गुरुवार को अपने इस्तीफे की पेशकश कर दी। उन्होंने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा कि मैं अफसरों के तानाशाही रवैये की वजह से इस्तीफा देने का मन बना रहा हूं। सहनी का कहना है कि अधिकारी तो अधिकारी विभाग के चपरासी भी मेरी बात नहीं सुनते हैं। ऐसे में मैं पार्टी में बना रहूंगा और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बताए रास्ते पर चलता रहूंगा, लेकिन मंत्री पद से त्यागपत्र दे दूंगा।

सहनी ने कहा, मैं सालों से परेशानी और यातना झेल रहा हूं। मैं सुविधाओं का फायदा उठाने के लिए मंत्री नहीं बना हूं, जनता की सेवा करने के लिए बना हूं। ऐसे में जब मैं जनता का काम ही नहीं कर पाऊंगा तो मंत्री रहकर क्या करूंगा। उन्होंने कहा कि यह कोई  जल्दबाजी में लिया गया फैसला नहीं है। लंबे समय तक अधिकारियों से परेशान होने के बाद मैंने यह कदम उठाया है। सहनी ने कहा कि लोग कहते हैं कि नेता चोर हैं और मैं कहता हूं कि अधिकारी चोर हैं।



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