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Taliban Warning Said Two Weeks Enough To Control On Afghanistan – तालिबान की चेतावनी: कहा- अफगानिस्तान पर नियंत्रण के लिए दो सप्ताह काफी 


रूस के विशेष दूत जमीर काबुलोव के साथ तालिबान का प्रतिनिधिमंडल
– फोटो : Agency

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हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा अफगान सुरक्षा बलों पर भरोसा जताने के ठीक बाद तालिबान ने धमकी दी है कि यदि हम चाहें तो मात्र दो सप्ताह में अफगानिस्तान को अपने नियंत्रण में ले सकते हैं। मॉस्को दौरे पर गए तालिबान प्रतिनिधिमंडल ने बाइडन के भरोसे को चुनौती दी है। इस बीच, अफगानिस्तान ने तालिबान के विस्तार को देखते हुए सीमा पर सैनिकों को भेज दिया है।

तालिबान द्वारा अफगानिस्तान के 85 फीसदी हिस्से पर नियंत्रण के दावे के तुरंत बाद मॉस्को पहुंचे तालिबानी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख शहाबुद्दीन दिलावर ने पत्रकारों से कहा कि हमारे पास करीब 75 हजार लड़ाके हैं जिनका मुकाबला करना अफगानिस्तान के तीन लाख जवानों के वश में नहीं है। बाइडन ने अफगानिस्तान में तालिबान के प्रभाव को नकारते हुए कहा था कि उन्हें अफगान सुरक्षा बलों पर भरोसा है।

इस पर दिलावर ने कहा, हम दो हफ्ते में देश पर नियंत्रण बना सकते हैं, बेहतर है कि विदेशी सेना शांति से अफगानिस्तान छोड़ने के मौके का फायदा उठाए। इस बीच, तालिबान ने पश्चिम अफगानिस्तान में ईरान और चीन से लगे सीमा क्षेत्र में भी कब्जा कर लिया है। तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने बताया कि हमने ईरानी सीमा पर इस्लाम कला के सीमावर्ती शहर और तुर्कमेनिस्तान के तोरघुंडी क्रॉसिंग पर कब्जा कर लिया है। 

ईरान-अफगानिस्तान रूट पर जमे तालिबानी
हेरात प्रांत में गवर्नर के प्रवक्ता जिलानी फरहाद ने कहा कि अधिकारी इस्लाम कला बंदरगाह पर फिर से कब्जा करने के लिए नए सैनिकों को तैनात करने की तैयारी कर रहे हैं। यह ईरान-अफगानिस्तान के बीच सबसे बड़ा व्यापार मार्ग है। इस बीच, मॉस्को में तालिबान अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने दावा किया कि उन्होंने अफगानिस्तान के 400 जिलों में से करीब 250 पर कब्जा कर लिया है। 

चीन को दोस्त के रूप में देखता है तालिबान 
अफगानिस्तान के बदख्शां प्रांत पर तालिबानी कब्जे के साथ ही इसके नियंत्रित इलाकों की सीमा चीन के शिनजियांग प्रांत की सरहद तक पहुंच गई है। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीय जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अतीत में अलकायदा और चीन के उइगर विद्रोही गुटों के साथ तालिबान के अच्छे संबंध रहे हैं। इसे लेकर चीन चिंतित है। लेकिन अब तालिबान चीन की चिंताओं को शांत करते हुए चीनी सरकार से मान्यता लेने की कोशिश में है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक तालिबान प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा है कि तालिबान, चीन को अफगानिस्तान के दोस्त के रूप में देखता है और उससे वार्ता की उम्मीद रखता है।

आतंक के खिलाफ अफगान सरकार ने मांगी भारत, रूस व चीन से मदद
तालिबान के अफगानिस्तान में 85 फीसदी हिस्से पर नियंत्रण के दावे के बाद अफगान सरकार ने भारत, रूस व चीन की सेनाओं समेत अन्य देशों से समर्थन मांगा है। अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हमदुल्ला मोहिब ने कहा है कि भारत, रूस और चीन की सेनाओं सहित बाकी देशों से किसी भी तकनीकी या आतंकवाद विरोधी अभियान के समर्थन का अफगानिस्तान स्वागत करता है। मोहिब ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना यह भी कहा कि किसी भी बाहरी देश को अफगान सरकार के आंतरिक मामलों में दखल नहीं करना चाहिए। 

स्थायी शांति के लिए अहम है क्षेत्रीय समर्थन
अमेरिका ने कहा है कि स्थायी शांति के लिए अफगान नेतृत्व और स्वामित्व वाली सरकार को क्षेत्रीय सहमति व समर्थन महत्वपूर्ण है। उसने जोर दिया कि अफगानिस्तान के पड़ोसियों और क्षेत्रीय देशों की अफगानिस्तान के भविष्य में वास्तविक जिम्मेदारी है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के साथ फोन पर हुई बातचीत के कुछ घंटे बाद यह टिप्पणी की है।

विस्तार

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा अफगान सुरक्षा बलों पर भरोसा जताने के ठीक बाद तालिबान ने धमकी दी है कि यदि हम चाहें तो मात्र दो सप्ताह में अफगानिस्तान को अपने नियंत्रण में ले सकते हैं। मॉस्को दौरे पर गए तालिबान प्रतिनिधिमंडल ने बाइडन के भरोसे को चुनौती दी है। इस बीच, अफगानिस्तान ने तालिबान के विस्तार को देखते हुए सीमा पर सैनिकों को भेज दिया है।

तालिबान द्वारा अफगानिस्तान के 85 फीसदी हिस्से पर नियंत्रण के दावे के तुरंत बाद मॉस्को पहुंचे तालिबानी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख शहाबुद्दीन दिलावर ने पत्रकारों से कहा कि हमारे पास करीब 75 हजार लड़ाके हैं जिनका मुकाबला करना अफगानिस्तान के तीन लाख जवानों के वश में नहीं है। बाइडन ने अफगानिस्तान में तालिबान के प्रभाव को नकारते हुए कहा था कि उन्हें अफगान सुरक्षा बलों पर भरोसा है।

इस पर दिलावर ने कहा, हम दो हफ्ते में देश पर नियंत्रण बना सकते हैं, बेहतर है कि विदेशी सेना शांति से अफगानिस्तान छोड़ने के मौके का फायदा उठाए। इस बीच, तालिबान ने पश्चिम अफगानिस्तान में ईरान और चीन से लगे सीमा क्षेत्र में भी कब्जा कर लिया है। तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने बताया कि हमने ईरानी सीमा पर इस्लाम कला के सीमावर्ती शहर और तुर्कमेनिस्तान के तोरघुंडी क्रॉसिंग पर कब्जा कर लिया है। 

ईरान-अफगानिस्तान रूट पर जमे तालिबानी

हेरात प्रांत में गवर्नर के प्रवक्ता जिलानी फरहाद ने कहा कि अधिकारी इस्लाम कला बंदरगाह पर फिर से कब्जा करने के लिए नए सैनिकों को तैनात करने की तैयारी कर रहे हैं। यह ईरान-अफगानिस्तान के बीच सबसे बड़ा व्यापार मार्ग है। इस बीच, मॉस्को में तालिबान अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने दावा किया कि उन्होंने अफगानिस्तान के 400 जिलों में से करीब 250 पर कब्जा कर लिया है। 

चीन को दोस्त के रूप में देखता है तालिबान 

अफगानिस्तान के बदख्शां प्रांत पर तालिबानी कब्जे के साथ ही इसके नियंत्रित इलाकों की सीमा चीन के शिनजियांग प्रांत की सरहद तक पहुंच गई है। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीय जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अतीत में अलकायदा और चीन के उइगर विद्रोही गुटों के साथ तालिबान के अच्छे संबंध रहे हैं। इसे लेकर चीन चिंतित है। लेकिन अब तालिबान चीन की चिंताओं को शांत करते हुए चीनी सरकार से मान्यता लेने की कोशिश में है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक तालिबान प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा है कि तालिबान, चीन को अफगानिस्तान के दोस्त के रूप में देखता है और उससे वार्ता की उम्मीद रखता है।

आतंक के खिलाफ अफगान सरकार ने मांगी भारत, रूस व चीन से मदद

तालिबान के अफगानिस्तान में 85 फीसदी हिस्से पर नियंत्रण के दावे के बाद अफगान सरकार ने भारत, रूस व चीन की सेनाओं समेत अन्य देशों से समर्थन मांगा है। अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हमदुल्ला मोहिब ने कहा है कि भारत, रूस और चीन की सेनाओं सहित बाकी देशों से किसी भी तकनीकी या आतंकवाद विरोधी अभियान के समर्थन का अफगानिस्तान स्वागत करता है। मोहिब ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना यह भी कहा कि किसी भी बाहरी देश को अफगान सरकार के आंतरिक मामलों में दखल नहीं करना चाहिए। 

स्थायी शांति के लिए अहम है क्षेत्रीय समर्थन

अमेरिका ने कहा है कि स्थायी शांति के लिए अफगान नेतृत्व और स्वामित्व वाली सरकार को क्षेत्रीय सहमति व समर्थन महत्वपूर्ण है। उसने जोर दिया कि अफगानिस्तान के पड़ोसियों और क्षेत्रीय देशों की अफगानिस्तान के भविष्य में वास्तविक जिम्मेदारी है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के साथ फोन पर हुई बातचीत के कुछ घंटे बाद यह टिप्पणी की है।



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