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Reason For Pv Sindhu Victory: Sindhu Used To Play Alone Against Three Boys, Know How The New Coach Changed Her Game In Seven Points – सिंधु की जीत की वजह: तीन लड़कों के खिलाफ अकेले खेलती थीं सिंधु, सात बिंदुओं में जानिए नए कोच ने कैसे बदला उनका गेम


स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: योगेश साहू
Updated Sun, 01 Aug 2021 09:06 PM IST

सार

इस ओलंपिक में सेमीफाइनल तक पहुंचने के सफर में देश की बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु ने एक भी मुकाबला नहीं हारा। क्वार्टर फाइनल में उन्हें जापान की यामागुची से कड़ी टक्कर मिली, लेकिन आखिर में अपने अटैकिंग ग्राउंड स्मैश की बदौलत उन्होंने दो गेम पॉइंट बचाए और दो सीधे सेट जीतकर सेमीफाइनल में पहुंच गईं। सिंधु को बड़ी मैच की खिलाड़ी कहा जाता है। बड़े मैच में अच्छा प्रदर्शन करने की उनकी काबिलियत को बनाए रखने में उनके कोरियाई कोच का बड़ा योगदान है। जानते हैं उनके बारे में…

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पीवी सिंधु को करियर में तीन कोच मिले। पहले पुलेला गोपीचंद थे, जिनका सिंधु के करियर को आकार देने में बड़ा योगदान रहा है। उन्हीं की कोचिंग में सिंधु ने रियो ओलंपिक्स में रजत पदक जीता था। दूसरी कोच दक्षिण कोरिया की किम जी ह्युन थीं, जिन्होंने 2019 में निजी कारणों से इस्तीफा दे दिया। ह्युन के जाने के बाद पुरुष कोच पार्क तेई सेंग उन्हें ट्रेनिंग देने लगे।

पार्क भी दक्षिण कोरिया से हैं। वे 2004 के एथेंस ओलंपिक में क्वार्टर फाइनल खेल चुके हैं। 2002 में उन्होंने बुसान में खेले गए एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। वे 2013 से 2018 के बीच कोरियाई टीम के नेशनल कोच रह चुके हैं। उन्होंने हैदराबाद के गाचीबावली स्टेडियम में सिंधु को ट्रेनिंग देना शुरू की थी। पार्क की खासियत यह है कि वह प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी की स्ट्रैटजी को बखूबी समझ लेते हैं।

7 बिंदुओं में जानिए पार्क ने सिंधु को किस तरह ट्रेनिंग दी

  • पार्क ने दबाव में श्रेष्ठ प्रदर्शन देने और बड़े मुकाबलों में मनोवैज्ञानिक तौर पर खुद को मजबूत रखने की सिंधु की काबिलियत को और मजबूत किया।
  • पहले सिंधु का डिफेंस कमजोर था, अटैक मजबूत था। बैडमिंटन की हर बड़ी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी इस बात से वाकिफ थीं कि सिंधु अपने मजबूत अटैक के चलते पावरफुल स्मैश खेलती हैं। खिलाड़ी उन्हें थकाकर उनके स्मैश का इंतजार करते थे और उसे डिफेंड कर पॉइंट हासिल कर लेते थे। कोच पार्क ने सिंधु के डिफेंस स्किल्स पर काम किया।
  • जब पिछले साल टोक्यो ओलंपिक टल गए तो कोच ने बचे हुए वक्त का फायदा उठाते हुए सिंधु के मोशन स्किल्स को मजबूत किया। उन्हें ड्रॉप शॉट और हाफ स्मैश की ट्रेनिंग दी।
  • सिंधु की ट्रेनिंग के लिए कोच हैदराबाद के स्टेडियम में दूसरी एकेडमी से तीन-चार लड़कों को बुला लेते थे। कोर्ट में एक तरफ सिंधु होती थीं तो सामने की तरफ तीन-तीन शटलर होते थे। एक शटलर सामने की तरफ होता था, दो बैक कोर्ट में होते थे। वे हर पांच-दस मिनट में अपनी पोजिशन बदल लिया करत थे।
  • कोच इन लड़कों से कहते थे कि वे मोशन क्रॉस, स्लाइस स्मैश और बॉडी स्मैश जैसे शॉट खेलकर सिंधु को कन्फ्यूज करें ताकि सिंधु का डिफेंस मजबूत हो सके।
  • पहले सिंधु फोर हैंड शॉट ही खेलती थीं। नई तरह से ट्रेनिंग के बाद अब वे बैक हैंड शॉट बखूबी खेलने लगी हैं।
  • सिंधु के साथ कोच कुछ अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के पुराने वीडियोज देखकर उनके खेल को समझने की कोशिश करते थे। इससे सिंधु का गेम ज्यादा मजबूत हुआ।

विस्तार

पीवी सिंधु को करियर में तीन कोच मिले। पहले पुलेला गोपीचंद थे, जिनका सिंधु के करियर को आकार देने में बड़ा योगदान रहा है। उन्हीं की कोचिंग में सिंधु ने रियो ओलंपिक्स में रजत पदक जीता था। दूसरी कोच दक्षिण कोरिया की किम जी ह्युन थीं, जिन्होंने 2019 में निजी कारणों से इस्तीफा दे दिया। ह्युन के जाने के बाद पुरुष कोच पार्क तेई सेंग उन्हें ट्रेनिंग देने लगे।

पार्क भी दक्षिण कोरिया से हैं। वे 2004 के एथेंस ओलंपिक में क्वार्टर फाइनल खेल चुके हैं। 2002 में उन्होंने बुसान में खेले गए एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। वे 2013 से 2018 के बीच कोरियाई टीम के नेशनल कोच रह चुके हैं। उन्होंने हैदराबाद के गाचीबावली स्टेडियम में सिंधु को ट्रेनिंग देना शुरू की थी। पार्क की खासियत यह है कि वह प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी की स्ट्रैटजी को बखूबी समझ लेते हैं।

7 बिंदुओं में जानिए पार्क ने सिंधु को किस तरह ट्रेनिंग दी

  • पार्क ने दबाव में श्रेष्ठ प्रदर्शन देने और बड़े मुकाबलों में मनोवैज्ञानिक तौर पर खुद को मजबूत रखने की सिंधु की काबिलियत को और मजबूत किया।
  • पहले सिंधु का डिफेंस कमजोर था, अटैक मजबूत था। बैडमिंटन की हर बड़ी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी इस बात से वाकिफ थीं कि सिंधु अपने मजबूत अटैक के चलते पावरफुल स्मैश खेलती हैं। खिलाड़ी उन्हें थकाकर उनके स्मैश का इंतजार करते थे और उसे डिफेंड कर पॉइंट हासिल कर लेते थे। कोच पार्क ने सिंधु के डिफेंस स्किल्स पर काम किया।
  • जब पिछले साल टोक्यो ओलंपिक टल गए तो कोच ने बचे हुए वक्त का फायदा उठाते हुए सिंधु के मोशन स्किल्स को मजबूत किया। उन्हें ड्रॉप शॉट और हाफ स्मैश की ट्रेनिंग दी।
  • सिंधु की ट्रेनिंग के लिए कोच हैदराबाद के स्टेडियम में दूसरी एकेडमी से तीन-चार लड़कों को बुला लेते थे। कोर्ट में एक तरफ सिंधु होती थीं तो सामने की तरफ तीन-तीन शटलर होते थे। एक शटलर सामने की तरफ होता था, दो बैक कोर्ट में होते थे। वे हर पांच-दस मिनट में अपनी पोजिशन बदल लिया करत थे।
  • कोच इन लड़कों से कहते थे कि वे मोशन क्रॉस, स्लाइस स्मैश और बॉडी स्मैश जैसे शॉट खेलकर सिंधु को कन्फ्यूज करें ताकि सिंधु का डिफेंस मजबूत हो सके।
  • पहले सिंधु फोर हैंड शॉट ही खेलती थीं। नई तरह से ट्रेनिंग के बाद अब वे बैक हैंड शॉट बखूबी खेलने लगी हैं।
  • सिंधु के साथ कोच कुछ अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के पुराने वीडियोज देखकर उनके खेल को समझने की कोशिश करते थे। इससे सिंधु का गेम ज्यादा मजबूत हुआ।



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