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Moscow Format Important Meeting Will Be Held Today Regarding The Situation In Afghanistan And Taliban India Will Also Involved – मास्को-फार्मेट: अफगानिस्तान के हालात और तालिबान को लेकर आज होगी अहम बैठक, भारत भी होगा शामिल


सार

मास्को फार्मेट के तहत होने वाली इस बैठक में अफगानिस्तान के राजनीतिक और सैन्य हालातों पर चर्चा की जाएगी। इसमें अफगानिसतान को मानवीय आधार पर दी जाने वाली मदद पर भी विचार होगा। अफगानिस्तान में सरकार बनाने के बाद ये पहला ऐसा मंच है जहां पर तालिबान एक साथ दस देशों के समक्ष अपने विचार रखेगा।

रूस के विदेश मंत्री सरगी लावरोव
– फोटो : सोशल मीडिया

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रूस की राजधानी मास्को में बुधवार को मास्को-फार्मेट की तीसरी बैठक होने जा रही है। अफगानिस्तान के हालात और तालिबान को लेकर होने वाली ये बैठक काफी खास है। इस बैठक में 10 देशों शीर्ष अधिकारी शामिल हो रहे हैं, जिसमें एक भारत भी है। तालिबान का प्रतिनिधिमंडल भी इस बैठक में शामिल होगा।

मास्को फार्मेट के तहत होने वाली इस बैठक में अफगानिस्तान के राजनीतिक और सैन्य हालातों पर चर्चा की जाएगी। इसमें अफगानिसतान को मानवीय आधार पर दी जाने वाली मदद पर भी विचार होगा। अफगानिस्तान में सरकार बनाने के बाद ये पहला ऐसा मंच है जहां पर तालिबान एक साथ दस देशों के समक्ष अपने विचार रखेगा।

2017 में हुई थी मास्को-फार्मेट की शुरुआत
इस बैठक को रूस के विदेश मंत्री सरगी लावरोव संबोधित करेंगे। मास्को-फार्मेट की शुरुआत 2017 में हुई थी। उस वक्त इसमें भारत और रूस के अलावा चीन, अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान शामिल थे। बैठक में भारत की तरफ से प्रतिनिधि के शामिल होने की घोषणा कर दी गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि 20 अक्तूबर को अफगानिस्तान मसले पर मास्को-फार्मेट पर बैठक का आमंत्रण मिला है और हम इसमें भाग ले रहे हैं।

बैठक के बाद संयुक्त बयान जारी किया जाएगा
रूसी विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि इस बैठक में अफगानिस्तान में सैन्य और राजनीतिक विकास की संभावनाओं और समावेशी सरकार गठन पर चर्चा की जाएगी। हम सभी अफगानिस्तान में मानवीय संकट को रोकने के लिए दुनिया की कोशिशों को और मजबूत करेंगे। बैठक के बाद एक संयुक्त बयान भी जारी किया जाएगा।

तालिबान प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अंतरिम अफगान सरकार के उप प्रधानमंत्री अब्दुल सलाम हनफी करेंगे। यह जानकारी अफगानिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल कहर बल्खी ने ट्विटर के जरिए दी है। तालिबान को उम्मीद है कि इस बैठक में आपसी हितों के मसलों पर बातचीत की जाएगी।

अमेरिका वार्ता में नहीं होगा शामिल
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने सोमवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि ‘हम मास्को वार्ता में भाग नहीं लेंगे। हालांकि यह एक सकारात्मक मंच रहा है। हम आगे इस मंच में शामिल होने की उम्मीद रखते हैं, लेकिन इस सप्ताह हम भाग लेने की स्थिति में नहीं हैं।’ 
 

भारत निभाएगा अहम भूमिका
रूस ने जानकारी दी है कि अफगानिस्तान के हालात को लेकर मास्को फार्मेट की बैठक में 10 देश और तालिबान का एक प्रतिनिधिमंडल हिस्सा लेगा। इस बैठक में भारत भी अहम भूमिका निभाएगा। अफगानिस्तान में तालिबान के आने के बाद से भारत ने उससे पूरी तरह से दूरी बना रखी है। तालिबान के आने के बाद से अब तक केवल एक ही बार 31 अगस्त को दोनों की औपचारिक बातचीत हुई है। ये बातचीत दोहा में हुई थी। तालिबान को लेकर भारत की स्थिति बेहद स्पष्ट है। भारत चाहता है कि अफगानिस्तान आतंकियों के लिए जन्नत न बन सके। भारत हमेशा से ही अफगानिस्तान की शांति और अखंडता का समर्थन करता रहा है।

अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनने के करीब दो माह बाद भी भारत ने अब तक तालिबान को किसी भी तरह का सहयोग देने का कोई संकेत नहीं दिया है। भारत का यह भी कहना है कि वो तालिबान के मुद्दे पर विश्व बिरादरी के साथ है। अफगानिस्तान में स्थित अपने दूतावास और वाणिज्य दूतावासों को भारत पहले ही खाली कर चुका है। हालांकि तालिबान ने अपील की है कि इनको दोबारा शुरू करना चाहिए।

विस्तार

रूस की राजधानी मास्को में बुधवार को मास्को-फार्मेट की तीसरी बैठक होने जा रही है। अफगानिस्तान के हालात और तालिबान को लेकर होने वाली ये बैठक काफी खास है। इस बैठक में 10 देशों शीर्ष अधिकारी शामिल हो रहे हैं, जिसमें एक भारत भी है। तालिबान का प्रतिनिधिमंडल भी इस बैठक में शामिल होगा।

मास्को फार्मेट के तहत होने वाली इस बैठक में अफगानिस्तान के राजनीतिक और सैन्य हालातों पर चर्चा की जाएगी। इसमें अफगानिसतान को मानवीय आधार पर दी जाने वाली मदद पर भी विचार होगा। अफगानिस्तान में सरकार बनाने के बाद ये पहला ऐसा मंच है जहां पर तालिबान एक साथ दस देशों के समक्ष अपने विचार रखेगा।

2017 में हुई थी मास्को-फार्मेट की शुरुआत

इस बैठक को रूस के विदेश मंत्री सरगी लावरोव संबोधित करेंगे। मास्को-फार्मेट की शुरुआत 2017 में हुई थी। उस वक्त इसमें भारत और रूस के अलावा चीन, अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान शामिल थे। बैठक में भारत की तरफ से प्रतिनिधि के शामिल होने की घोषणा कर दी गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि 20 अक्तूबर को अफगानिस्तान मसले पर मास्को-फार्मेट पर बैठक का आमंत्रण मिला है और हम इसमें भाग ले रहे हैं।

बैठक के बाद संयुक्त बयान जारी किया जाएगा

रूसी विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि इस बैठक में अफगानिस्तान में सैन्य और राजनीतिक विकास की संभावनाओं और समावेशी सरकार गठन पर चर्चा की जाएगी। हम सभी अफगानिस्तान में मानवीय संकट को रोकने के लिए दुनिया की कोशिशों को और मजबूत करेंगे। बैठक के बाद एक संयुक्त बयान भी जारी किया जाएगा।

तालिबान प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अंतरिम अफगान सरकार के उप प्रधानमंत्री अब्दुल सलाम हनफी करेंगे। यह जानकारी अफगानिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल कहर बल्खी ने ट्विटर के जरिए दी है। तालिबान को उम्मीद है कि इस बैठक में आपसी हितों के मसलों पर बातचीत की जाएगी।

अमेरिका वार्ता में नहीं होगा शामिल

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने सोमवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि ‘हम मास्को वार्ता में भाग नहीं लेंगे। हालांकि यह एक सकारात्मक मंच रहा है। हम आगे इस मंच में शामिल होने की उम्मीद रखते हैं, लेकिन इस सप्ताह हम भाग लेने की स्थिति में नहीं हैं।’ 

 

भारत निभाएगा अहम भूमिका

रूस ने जानकारी दी है कि अफगानिस्तान के हालात को लेकर मास्को फार्मेट की बैठक में 10 देश और तालिबान का एक प्रतिनिधिमंडल हिस्सा लेगा। इस बैठक में भारत भी अहम भूमिका निभाएगा। अफगानिस्तान में तालिबान के आने के बाद से भारत ने उससे पूरी तरह से दूरी बना रखी है। तालिबान के आने के बाद से अब तक केवल एक ही बार 31 अगस्त को दोनों की औपचारिक बातचीत हुई है। ये बातचीत दोहा में हुई थी। तालिबान को लेकर भारत की स्थिति बेहद स्पष्ट है। भारत चाहता है कि अफगानिस्तान आतंकियों के लिए जन्नत न बन सके। भारत हमेशा से ही अफगानिस्तान की शांति और अखंडता का समर्थन करता रहा है।

अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनने के करीब दो माह बाद भी भारत ने अब तक तालिबान को किसी भी तरह का सहयोग देने का कोई संकेत नहीं दिया है। भारत का यह भी कहना है कि वो तालिबान के मुद्दे पर विश्व बिरादरी के साथ है। अफगानिस्तान में स्थित अपने दूतावास और वाणिज्य दूतावासों को भारत पहले ही खाली कर चुका है। हालांकि तालिबान ने अपील की है कि इनको दोबारा शुरू करना चाहिए।



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